
50,000+
Pujas Performed
100+
Experienced Pandits
12+
Years of Service
4.9/5
Devotee Rating
सोमनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम और सबसे पवित्र माना जाता है। यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है।
यह मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है और इसका वर्तमान स्वरूप सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर 1951 में पुनर्निर्मित किया गया।
सोमनाथ का अर्थ है 'चंद्रमा के स्वामी' क्योंकि यहां चंद्रमा ने अपने श्राप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से किया। चंद्रमा अपनी पत्नियों में से केवल रोहिणी से प्रेम करते थे जिससे क्रोधित होकर दक्ष ने उन्हें क्षय रोग का श्राप दिया।
चंद्रमा ने प्रभास तीर्थ में भगवान शिव की तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उनके श्राप को आंशिक रूप से दूर किया - चंद्रमा घटता-बढ़ता रहेगा। इसीलिए यह स्थान सोमनाथ (चंद्र का स्वामी) कहलाया।
इतिहास में सोमनाथ मंदिर को कई बार नष्ट किया गया और हर बार इसे पुनर्निर्मित किया गया। महमूद गजनवी ने 1026 में इसे लूटा और नष्ट किया।
यह मंदिर हिंदू धर्म की अजेय भावना का प्रतीक है। वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली में बना है और इसके शिखर की ऊंचाई 155 फीट है।
मंदिर का 'बाण स्तंभ' प्रसिद्ध है जो बताता है कि इस बिंदु से दक्षिणी ध्रुव तक कोई भूमि नहीं है।