हजारों वर्षों की दिव्य विरासत, राजाओं की भक्ति, और अखंड आस्था की गाथा
महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे अत्यंत विशेष बनाता है।
पुराणों में उज्जयिनी को 'मोक्षदायिनी' कहा गया है। यहाँ महाकाल के दर्शन मात्र से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
~3000 BCE
पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने दूषण राक्षस के वध के बाद यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए।
~1500 BCE
स्कंद पुराण में उज्जयिनी को मोक्षदायिनी नगरी के रूप में वर्णित किया गया।
~300 BCE
चंद्रगुप्त मौर्य के समय उज्जयिनी पश्चिमी भारत का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था।
375-415 CE
राजा विक्रमादित्य ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया। नवरत्न सभा की स्थापना हुई।
1107 CE
राजा भोज द्वारा मंदिर का विस्तार और पुनर्निर्माण कराया गया।
1234 CE
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश ने मंदिर को क्षति पहुंचाई।
1734 CE
मराठा सेनापति राणोजी शिंदे द्वारा वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया।
1980-2000
भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार।
2022
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 856 करोड़ की लागत से निर्मित महाकाल लोक का उद्घाटन।
महाकाल मंदिर मराठा, भूमिज और चालुक्य शैलियों का अद्भुत मिश्रण है।
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग स्थित है, जो अद्वितीय है।
विशाल हॉल जहाँ भक्त एकत्र होते हैं।
मराठा शैली का भव्य शिखर, दूर से दिखाई देता है।
मंदिर के चारों ओर पवित्र परिक्रमा पथ।
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