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रामनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है और यह बारह ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवां है।
यह मंदिर भगवान राम द्वारा स्थापित माना जाता है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
मंदिर के 22 पवित्र कुंडों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
रामायण के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय के बाद ब्रह्महत्या दोष (रावण वध) के प्रायश्चित के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की।
सीता माता ने रेत से शिवलिंग बनाया था जो आज भी मुख्य देवता के रूप में पूजित है। हनुमान जी द्वारा कैलाश से लाया गया लिंग 'हनुमद लिंग' के रूप में अलग से स्थापित है।
रामेश्वरम भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित है और इसे दक्षिण का काशी भी कहा जाता है।
यहां का मंदिर गलियारा विश्व का सबसे लंबा है (1,220 मीटर)।