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घृष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफाओं के पास वेरुल गांव में स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम (बारहवां) है।
यह मंदिर प्रसिद्ध एलोरा और अजंता गुफाओं के निकट होने के कारण पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मंदिर का वर्तमान स्वरूप अहिल्याबाई होल्कर ने 18वीं शताब्दी में पुनर्निर्मित कराया था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, घुष्मा नामक एक भक्त महिला ने भगवान शिव की कठोर आराधना की थी।
उसके पति सुधर्मा की पहली पत्नी ने ईर्ष्या में घुष्मा के पुत्र की हत्या कर दी। घुष्मा ने अपनी भक्ति जारी रखी और शिव ने प्रसन्न होकर उसके पुत्र को जीवित कर दिया।
शिव ने यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर निवास किया जिसे घुष्मेश्वर या घृष्णेश्वर कहा गया।
घृष्णेश्वर सबसे छोटे ज्योतिर्लिंगों में से एक है लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व अपार है।
एलोरा की विश्व प्रसिद्ध गुफाओं के पास होने से यहां भक्तों और पर्यटकों दोनों का आगमन होता है।