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महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
महाकाल का अर्थ है 'काल के स्वामी' या 'मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले'। उज्जैन को प्राचीन भारत की सात पवित्र नगरियों (सप्त पुरी) में से एक माना जाता है।
यहां की प्रसिद्ध भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है जहां शिवलिंग पर शुद्ध भस्म (विभूति) चढ़ाई जाती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, उज्जैन के राजा चंद्रसेन भगवान शिव के परम भक्त थे। एक बार दुष्मनों ने उज्जैन पर आक्रमण किया। तब भगवान शिव ने महाकाल के रूप में प्रकट होकर शत्रुओं का नाश किया।
भक्तों की प्रार्थना पर भगवान शिव ने यहां स्थायी रूप से निवास करने का वचन दिया और ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए।
महाकालेश्वर एकमात्र स्वयंभू (स्वयं प्रकट) ज्योतिर्लिंग माना जाता है जो शक्ति से संपन्न है।
यह मंदिर तांत्रिक परंपरा का भी केंद्र है और यहां की भस्म आरती में चिता की भस्म का प्रयोग किया जाता है जो मोक्ष का प्रतीक है।
उज्जैन में प्रति 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है।