Lord Kaal Bhairav - The Fierce Form of Shiva
काल भैरव भगवान शिव का उग्र और भयंकर रूप हैं। वे काल (समय) के स्वामी हैं और उज्जैन तथा काशी के नगर कोतवाल माने जाते हैं। भैरव अष्टमी पर उनकी विशेष पूजा होती है। उन्हें मदिरा का भोग लगाया जाता है जो एक अद्भुत रहस्य है।
समय के स्वामी
शिव का भयंकर रूप
नगर कोतवाल
तांत्रिक पूजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने अहंकार वश पांचवां सिर उत्पन्न किया तो भगवान शिव ने काल भैरव रूप धारण करके उस सिर को काट दिया। तब से वे "ब्रह्महत्या" के पाप से मुक्ति पाने के लिए काशी आए और यहीं बस गए।
काल भैरव को उज्जैन और काशी दोनों नगरों का कोतवाल (रक्षक) माना जाता है। मान्यता है कि इन नगरों में प्रवेश से पहले भैरव बाबा की अनुमति लेनी चाहिए। बिना उनके दर्शन के यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।
उज्जैन के काल भैरव मंदिर में एक अद्भुत चमत्कार है - मूर्ति को मदिरा का भोग लगाया जाता है और मूर्ति स्वयं उसे ग्रहण कर लेती है। यह रहस्य आज तक अनसुलझा है।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ
बटुक भैरव मंत्र
ॐ भैरवाय नमः
भैरव को नमस्कार
काल भैरवाष्टकम्
काल भैरव स्तुति