न्यायाधीश • कर्मफल दाता

शनि पूजा

Shani Puja

शनि देव न्याय के देवता हैं। साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष निवारण के लिए शनि पूजा अत्यंत प्रभावकारी है। शनिवार को तेल दान और हनुमान पूजा से शनि प्रसन्न होते हैं।

2-3 घंटे
शनिवार
4.9 (3450 reviews)

पूजा के लाभ

  • साढ़ेसाती दोष शांति
  • ढैय्या निवारण
  • कर्म दोष से मुक्ति
  • न्यायिक मामलों में सफलता
  • व्यापार में स्थिरता
  • लंबी आयु
  • दरिद्रता से मुक्ति
  • कठिनाइयों से राहत

पूजा विधि

  1. 1शनिवार व्रत
  2. 2हनुमान चालीसा पाठ
  3. 3शनि मंत्र जाप
  4. 4तेल से अभिषेक
  5. 5काले तिल का दान
  6. 6शनि यंत्र पूजा
  7. 7छाया दान (लोहे के बर्तन)
  8. 8शनि स्तोत्र पाठ

साढ़ेसाती क्या है?

  • शनि चंद्रमा से 12वें भाव में - प्रारंभ
  • शनि चंद्रमा पर - मध्य (सबसे कठिन)
  • शनि चंद्रमा से 2रे भाव में - अंत
  • कुल 7.5 वर्ष का समय
  • जीवन में 2-3 बार आती है
  • कर्म शुद्धि का काल

शनि देव की महिमा

शनि देव सूर्य के पुत्र और छाया के गर्भ से उत्पन्न हैं। वे न्याय के देवता हैं और कर्मों के अनुसार फल देते हैं। उनकी दृष्टि को "शनि दृष्टि" कहते हैं जो अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

शनि की साढ़ेसाती जीवन की सबसे कठिन अवधियों में से एक मानी जाती है। परंतु यह शुद्धि का काल भी है। इस दौरान की गई तपस्या और पूजा का फल कई गुना मिलता है।

हनुमान जी की पूजा शनि शांति का सबसे प्रभावी उपाय है। शनिवार को तेल दान, काले तिल और उड़द का दान, नीलम रत्न धारण और शनि मंत्र जाप से शनि प्रसन्न होते हैं।

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साढ़ेसाती और शनि दोष निवारण हेतु