Rahu-Ketu Puja
राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो कालसर्प दोष, पितृदोष और अचानक समस्याओं के कारक होते हैं। राहु-केतु शांति पूजा से इन दोषों का निवारण होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
राहु और केतु छाया ग्रह हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय स्वर्भानु नामक असुर ने छल से अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया। सिर "राहु" और धड़ "केतु" बन गया।
राहु भ्रम, विदेश यात्रा, छुपे शत्रु और अचानक घटनाओं का कारक है। केतु आध्यात्मिकता, मोक्ष और विरक्ति का कारक है। दोनों 18 वर्षों में एक राशि को पार करते हैं।
नागपंचमी, राहुकाल और ग्रहण के समय राहु-केतु पूजा विशेष फलदायी होती है। गोमेद राहु के लिए और लहसुनिया केतु के लिए उपयुक्त रत्न हैं।