छाया ग्रह • कालसर्प निवारण

राहु-केतु पूजा

Rahu-Ketu Puja

राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो कालसर्प दोष, पितृदोष और अचानक समस्याओं के कारक होते हैं। राहु-केतु शांति पूजा से इन दोषों का निवारण होता है और जीवन में स्थिरता आती है।

2-3 घंटे
राहुकाल / केतुकाल
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पूजा के लाभ

  • कालसर्प दोष निवारण
  • अचानक समस्याओं से मुक्ति
  • भ्रम और भय से मुक्ति
  • विदेश यात्रा में सफलता
  • छुपे शत्रुओं से रक्षा
  • मानसिक शांति
  • आध्यात्मिक उन्नति
  • मोक्ष प्राप्ति में सहायता

पूजा विधि

  1. 1संकल्प और पूजा स्थापना
  2. 2नवग्रह पूजा
  3. 3राहु-केतु मंत्र जाप
  4. 4दुर्गा सप्तशती पाठ
  5. 5नाग पूजा
  6. 6तिल और सरसों तेल का दान
  7. 7हवन (नाग बलि)
  8. 8ब्राह्मण भोजन

कालसर्प दोष क्या है?

  • जब सभी ग्रह राहु-केतु के बीच हों
  • 12 प्रकार के कालसर्प दोष
  • विवाह/संतान में बाधा
  • व्यापार में अस्थिरता
  • भय और अशांति
  • स्वप्न में सर्प दिखना

राहु और केतु की महिमा

राहु और केतु छाया ग्रह हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय स्वर्भानु नामक असुर ने छल से अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया। सिर "राहु" और धड़ "केतु" बन गया।

राहु भ्रम, विदेश यात्रा, छुपे शत्रु और अचानक घटनाओं का कारक है। केतु आध्यात्मिकता, मोक्ष और विरक्ति का कारक है। दोनों 18 वर्षों में एक राशि को पार करते हैं।

नागपंचमी, राहुकाल और ग्रहण के समय राहु-केतु पूजा विशेष फलदायी होती है। गोमेद राहु के लिए और लहसुनिया केतु के लिए उपयुक्त रत्न हैं।

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कालसर्प दोष और छाया ग्रह शांति हेतु