दस महाविद्या • स्तंभन शक्ति

बगलामुखी पूजा

Baglamukhi Puja

माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं। उन्हें 'स्तंभन शक्ति' की देवी कहा जाता है जो शत्रुओं को स्तंभित (निष्क्रिय) कर देती हैं। पीले वस्त्र और पीले फूलों से उनकी पूजा होती है।

3-4 घंटे
विशेष मुहूर्त
4.9 (890 reviews)

पूजा के लाभ

  • शत्रु विजय एवं स्तंभन
  • कोर्ट केस में विजय
  • वाद-विवाद में सफलता
  • नेतृत्व क्षमता में वृद्धि
  • शक्ति और साहस प्राप्ति
  • बुरी नजर से रक्षा
  • तंत्र-मंत्र से सुरक्षा
  • राजनीतिक सफलता

पूजा विधि

  1. 1पीले वस्त्र धारण कर संकल्प
  2. 2बगलामुखी यंत्र स्थापना
  3. 3षोडशोपचार पूजा
  4. 4बगलामुखी कवच पाठ
  5. 5बगलामुखी मंत्र जाप (1.25 लाख)
  6. 6हवन (पीले तिल, पीली सरसों)
  7. 7ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा
  8. 8प्रसाद वितरण

किसे करनी चाहिए

  • जिन पर कोर्ट केस चल रहा हो
  • जिनके शत्रु अधिक हों
  • राजनीति या प्रशासन में कार्यरत
  • वकील, जज और न्यायिक अधिकारी
  • व्यापार में प्रतिस्पर्धा झेल रहे
  • तंत्र बाधा से पीड़ित

बगलामुखी माता के बारे में

माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। उनका स्वरूप पीत (पीला) वर्ण का है और वे पीले वस्त्र धारण करती हैं। उनका मुख्य शस्त्र 'मुद्गर' (गदा) है जिससे वे शत्रुओं का नाश करती हैं।

"बगला" का अर्थ है "मोह" और "मुखी" का अर्थ है "मुख वाली"। अर्थात जो शत्रुओं को मोहित कर उनका मुख (वाणी, बुद्धि) स्तंभित कर दें। इसलिए इन्हें "स्तंभन शक्ति" की देवी भी कहते हैं।

बगलामुखी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले वस्त्र, पीले फूल, पीली सरसों, पीले तिल और हल्दी से यह पूजा संपन्न होती है। मंगलवार और रविवार को यह पूजा विशेष फलदायी होती है।

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