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त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है। यहां से पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम होता है।
यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां का शिवलिंग अद्वितीय है क्योंकि इसमें तीन मुख हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह मंदिर नारायण नागबलि, कालसर्प शांति और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसी विशेष पूजाओं के लिए प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि गौतम ने इस स्थान पर तपस्या की थी। उन पर गोहत्या का झूठा आरोप लगा और उन्होंने भगवान शिव की कठोर आराधना की।
शिव ने प्रसन्न होकर गंगा को गोदावरी के रूप में यहां प्रवाहित किया जिससे गौतम ऋषि का पाप धुल गया। शिव ने यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास किया।
त्र्यंबकेश्वर में पितृ दोष, कालसर्प दोष और अन्य ग्रह दोषों के निवारण के लिए विशेष पूजाएं होती हैं।
कुशावर्त कुंड यहां का पवित्र जलाशय है जहां पितृ तर्पण किया जाता है।