हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं। वे पवन देव के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है।
रामायण में हनुमान जी की भक्ति और शौर्य का वर्णन है। समुद्र लांघकर लंका जाना, संजीवनी पर्वत लाना - ये उनके अद्भुत कार्य हैं।
हनुमान जी चिरंजीवी हैं और जहां भी रामकथा होती है, वहां अश्रुपूर्ण नेत्रों से सुनते हैं। मंगलवार और शनिवार उनकी पूजा के लिए विशेष शुभ हैं।
हनुमान को नमस्कार
हनुमान गायत्री
मन जैसी गति, पवन जैसा वेग