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हनुमान जी

बजरंगबली। पवनपुत्र। राम भक्त। शक्ति और भक्ति के प्रतीक।

हनुमान की महिमा

हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं। वे पवन देव के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है।

रामायण में हनुमान जी की भक्ति और शौर्य का वर्णन है। समुद्र लांघकर लंका जाना, संजीवनी पर्वत लाना - ये उनके अद्भुत कार्य हैं।

हनुमान जी चिरंजीवी हैं और जहां भी रामकथा होती है, वहां अश्रुपूर्ण नेत्रों से सुनते हैं। मंगलवार और शनिवार उनकी पूजा के लिए विशेष शुभ हैं।

हनुमान मंत्र

बीज मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

हनुमान को नमस्कार

गायत्री मंत्र

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि

हनुमान गायत्री

ध्यान मंत्र

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्

मन जैसी गति, पवन जैसा वेग

हनुमान पूजाएं

हनुमान पूजा

सुंदरकांड पाठ

हनुमान चालीसा पाठ

बजरंग बाण पाठ

जय श्री राम! जय हनुमान!

बजरंगबली की कृपा से शक्ति, सुरक्षा और विजय प्राप्त करें।

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